बारिश का पानी बचाने में दिल्ली की तिहाड़ जेल ने की देश के लिए नजीर पेश

नई दिल्ली। बारिश का पानी बचाने में दिल्ली की तिहाड़ जेल ने देश के लिए नजीर पेश कर रही है। पानी जमा करने के लिए जेल परिसर में बनाए गए सिस्टम से भूजल स्तर बेहतर होने के साथ गुणवत्ता में भी सुधार आया है। शहरी विकास मंत्रालय और केंद्रीय आवास का मानना है कि तिहाड़ जेल से सीख लेते हुए पूरे देश के शहरी क्षेत्रों में बारिश का पानी बचाया जा सकता है। जल संकट से जूझ रहे 255 जिलों के 756 शहरी निकायों के लिए केंद्रीय मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके लिए हर शहरी निकाय को अपने-अपने इलाके में न्यूनतम एक तालाब पुनर्जीवित करना है।

इसके लिए मंत्रालय अधिकारियों का कहना है कि जल संचय को आदत बनाने के लिए शहरी निकायों को जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। मंत्रालय की सलाह है कि शहरी निकाय समस्या से निपटने के लिए बारिश के पानी का अधिकतम संचय करें और शोधित पानी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए। पिछले महीने मिशन अमृत की गाइडलाइन में संशोधन भी कर दिया है। मिशन अमृत के तहत आवंटित रकम का इस्तेमाल जल स्रोतों को लबालब करने पर हो सकता है। मंत्रालय अधिकारी बताते हैं कि प्रोजेक्ट की रीयल टाइम समीक्षा होगी। शहरी निकायों के साथ राज्यों को भी इसकी रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

वहीं अधिकारियों का कहना है कि देश के चार मॉडल सबसे बेहतर हैं। तिहाड़ जेल के साथ इसमें दिल्ली की मदर डेयरी यूनिट तथा गुरुग्राम की गार्डन एस्टेट कालोनी और चैन्नई को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार तिहाड़ जेल में बारिश का पानी दो तरीकों से जमा होता है। छतों व सतह के पानी को इकट्ठा कर उसे रिचार्ज वेल में डालते हैं। कुएं में 10 मीटर की गहराई वाला 150 मिलीमीटर का रिचार्ज बोर है। अभी तक जेल की क्षमता का 50 फीसदी जल संग्रहण हो रहा है, लेकिन मॉडल काफी कारगर साबित हुआ है। इसे कंकड़ व खुरदुरी मिट्टी से भरा गया है। इससे गुजारने पर बारिश का पानी साफ हो जाता है।

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